हिंदी दिवस पर कविता-हिंदी ही तो है।पुष्पा श्रीवास्तव
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| पुष्पा श्रीवास्तव |
हिंदी ही तो है
बड़ी कोमल सरल सरिता सुहानी सी बहे कल कल।
बड़ी पावन सुहानी मधु मलय सी हिंदी ही तो है।
समझे जब कोई न बात और है व्यवहार जीवन में,
बताती प्रेम से भर प्यार प्यारी हिंदी ही तो है।
छायावाद के शंकर ,महादेवी बड़े भाये,
लिखे कामायनी , यामा जो चर्चित हिंदी ही तो है।
वो मुंशी प्रेम चंद जी का वो होरी आज भी जीवित,
कि चिंता और आंसू की कहानी हिंदी ही तो है।
कितनों ने लिखा कि गांव की गोरी बड़ी प्यारी,
मेहंदी और महावर भी लगाती हिंदी ही तो है।
सुनो हे देश के प्यारों इसे मत भूल जाओ तुम,
तुम्हारे पूर्वजों की यह धरोहर हिंदी ही तो है।
कभी जब डूब जाओगे समय के इन बहाओ में,
मेरी मानो उबारेगी तुम्हे वह
हिंदी ही तो है।

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