सोमवार, 9 नवंबर 2020

मां - भारती की वेदना-maa bhartee ki vedana

maa bharti ki vedana 

maa- bharti- ki -vedana
मां - भारती की वेदना





        मां - भारती की वेदना 


          जय -जय -जय मां भारती 

           करो   सुमन   स्वीकार  । 

            सागर  चरणों में  तेरे   , 

             हिम  - किरीट श्रृंगार  ।। 


 मुख  पर कैसी  वेदना  , 

क्यों  बहती अश्रू - धार ॽ

 शीघ्र  कहो  मां - भारती , 

  अपनी  करुण  - पुकार ।।  


           मां , तेरे संकेत  पर , 

            कह , तारे  लें  आऊं । 

             यदि चाहें बलिदान तू , 

             शीश  भेंट  में   लाऊं ।।


मां - भारती 

              पुत्र सुकवि मेरी व्यथा , 

           जन- जन तक पहुंचाओ। 

           जंग  लगे  गणतंत्र   को  , 

         क्रान्ति - सूर्य दिखलाओ ।। 


देखो कवि , गणतंत्र में  , 

 गण अयोग्य - बस  तन्त्र । 

संविधान  कंकाल   सम  , 

नाम - मात्र   गणतंत्र  ।। 


        भ्रष्ट - तन्त्र गणतंत्र से , 

          सन्तान मेरी अति त्रस्त । 

           नेता  हैं सब स्वार्थी    , 

          देश - द्रोह   में  मस्त  ।। 


सीमाओं  पर  अति क्रमण  , 

नित्य - नित्य  की   बात   । 

शान्ति - वार्ता  चल रही   , 

 वहीं  ढाक  के   पात   ।। 


            मेरे  तन  के घाव- यह , 

             आतंको   की   देन   । 

              तू  कब  चेतेगा  अरे  , 

                मां   के   भीगे  नैन ।। 


कवि  अपनी  हुंकार  से  , 

 मॄत  प्राणों   को  फूंक  । 

 देश  -  प्रेम  का  घोष  हो , 

 क्रान्ति - क्रान्ति  की  गूंज ।। 


          ऐसी  कविता लिख सुकवि 

          जन  - मानस हिल  जाए । 

          स्वाभिमान  जो  खो- गया 

         फिर वापिस  मिल  जाए ।। 


भावी नव  गणतंत्र  में  , 

सब  हों  शिक्षित - शिष्ट-। 

माता  की  संतुष्टि   हो  , 

लख  गणतंत्र  अभीष्ट  ।। 


        साहित्य  रचो ऐसा सुकवि, 

         देश -- भक्ति  युग  आए । 

       साहित्य - कला और संस्कृति

        जन - जन  में  रम  जाए ।। 

Maa-bhartee-ki-vedana
सीताराम चौहान पथिक




                            +91- 9650621606 

                            सीताराम चौहान पथिक


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