Senior citizen poem in hindi
हिंदी रचनाकार का प्रयास रहता है कि हर पोस्ट समाज के मुद्दों से जुड़ी हो उसी कड़ी मैं senior citizen poem in hindi जिसका शीर्षक चिन्तन है इस कविता मे लेखक ने बताया है कि किस तरह भारतीय संस्कृति पर कैसा प्रभाव छाया कि हम अपने माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ने को मजबूर हो गए। जिन माता-पिता ने बच्चों को स्थापित किया उन बच्चों ने बिना चिंतन के माँ-बाप को वृद्ध आश्रम मे भेज दिया । तो पाठकों के सामने प्रस्तुत है चिन्तन कविता
चिन्तन
बृद्ध जनो की करो सुरक्षा,
उन्हे उपेक्षित मत करिये।
भारत की संस्कार रीति को,
निशि दिन चिंतन करिये।
आज हमारे ही कारण,
बृद्धा आश्रम खुलते हैं।
अनपढ़ अज्ञानी ही नहीं,
पढ़े लिखे भी पलते हैं।
ये कैसा दुर्भाग्य देश का,
कैसी शिक्षा दीक्षा है।
जिसने तुमको पाला है,
उसकी अनगिनत उपेक्षा।
कैसा अर्थवाद युग आया,
कब आया ना जान सके।
शर्मसार अरविंद आज हैं,
और हमें अब मत करिये।
बृद्ध जनों की करो सुरक्षा,
उन्हें उपेक्षित मत करिये।
भारत की संस्कार रीति को,
निशि दिन चिंतन करिये।
![]() |
| अरविंद जायसवाल |
आपको Senior citizen poem in hindi हिंदी कविता कैसी लगी अपने सुझाव कमेन्ट बॉक्स मे अवश्य बताए अच्छी लगे तो फ़ेसबुक, ट्विटर, आदि सामाजिक मंचो पर शेयर करें इससे हमारी टीम का उत्साह बढ़ता है।
हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।|आपकी रचनात्मकता को हिंदीरचनाकार देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है| whatsapp के माद्यम से रचना भेजने के लिए 91 94540 02444, ९६२१३१३६०९ संपर्क कर कर सकते है।


Heart touching lines
जवाब देंहटाएं