रविवार, 18 अक्टूबर 2020

तन के रिश्ते बहुत हो गये-शत्रुघ्न सिंह चौहान

 तन के रिश्ते बहुत हो गये-शत्रुघ्न सिंह चौहान

तन- के- रिश्ते -बहुत- हो -गये
शत्रुघ्न सिंह चौहान

तन के रिश्ते बहुत हो गये

मन की बात ना कोई सुनता,

तन के रिश्ते बहुत हो गये।

सोचो उन पर क्या बीतेगी,

जिनके ही हैं केवल सपने।।


जिनके आँगन बादल बरसे

उनका    ही- पुरवाई

दर्द ना छेड़ो सन्नाटे में,

अब अतीत के चित्र सालते।।


सुना अमर होते उनको ही,

हँसते हँसते विष पान कर गये।

जैसे बूँद लहर से मिलकर

सागर की सीमा बन जाये।।


जितने चित्र बाहृय दृश्यो के

सबके  सब बेमानी लगते

कुसमित कुंजो वाले मधुबन,

पतझड़ में सूने -सूने लगते ।।


माना बिंदु अनेकों पथ पर

एक सरल रेखा बन  जाना।

छू कर धरा गगन को जैसे

ऐसी चांद किरन बन जाना।।

शत्रुघ्न सिंह चौहान

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