Neta par vyang
नेता पर व्यंग
राजनीति का पाठ पढ़ा
जो देश लूट ले जाते हैं
उनको ही नेता कहते हैं
जो सदा मुफ्त की खाते हैं
जनता को उल्लू बना बना
जो वोट मांगने आते हैं
वही बन जाते मंत्री तो
डांके सब पर डलवाते हैं
लंबे चौड़े भाषण देकर
सब्जबाग दिखलाते हैं
वादे पर वादे करते
पर न कभी उसे निभाते हैं
महंगाई जब-जब बढती
उनके पौबारह हो जाते
जो फटे हाल पहले रहते
फिर लक्ष्मीपति हो जाते
कर्जे पर कर्जा लेते
पर न कभी उसे चुकाते हैं
उनको ही नेता कहते हैं
जो देश हजम कर जाते हैं
नीच जाति धर्म भाषा सब पर
आपस में वही लड़ाते हैं
कुर्सी की खातिर
वह कितने तिकड़म अपनाते हैं
कुर्सी मिल जाने पर सबको
ठेंगा भी वही दिखाते हैं
कलयुग में सुन लो दीप वही
नेता पक्के कहलाते हैं
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| प्रदीप त्रिवेदी 'दीप' |
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