"कैसे सो पाओगे हिन्दुस्तान"
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| कैसे सो पाओगे हिन्दुस्तान |
कैसे सो पाओगे हिन्दुस्तान
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शर्म है
हैदराबाद
शाम में,दिन में कि
रात में
मरी हुई
मानवता पाई गई
है
जली हुई
लाश में
कैसे सो पाओगे हिन्दुस्तान
मोमबत्ती जलाएं कि समाज
अब नहीं
उठेगी प्रियंका रेड्डी
कैसे हो
हैदराबाद
सांस तो
ले रहे हो
प्रदूषण तो
नहीं है
मर तो
नहीं गए
जी तो
रहे हो
कैसे सो
पाओगे हिन्दुस्तान
भूल जाओगे
प्रियंका रेड्डी को ?
हैदराबाद में
दिल्ली घुस गई
कि
दिल्ली में
हैदराबाद
एक एक
कलियां कर रहे
हो बर्बाद
हर जगह
होता जा रहा
है हैदराबाद
मोतियों के
शहर ने
बोए हैं
इसबार आंसुओं के
मोती
दर्द,ज़ख्म
और चीखों के
बीच
हैदराबाद तुमको
नींद कैसे आएगी
?
भागमती तुमने
कुतुब से क्यों
लिया था हैदराबाद ?
भागमती के
शहर में
कैसे चीखी-तड़पी होगी प्रियंका रेड्डी
?
किसी क़ुतुब
ने ही छीन
लिया
प्रियंका रेड्डी
से उसका हैदराबाद.
डर लग
रहा था उसको
किन्तु कहीं
झूठी आश्वस्ति तलाश
रही थी
जघन्यों,निर्दयियों, दरिन्दों,भेड़ियों के
बीच
हैदराबाद को
दिल्ली से अलग
समझ बैठी थी
नादां थी
समझी नहीं
भेड़िये सब
जगह हैं
कैसे सो
पाओगे हिन्दुस्तान....
रक्तपिपासु पिशाच
फैल गए हैं
सर्वत्र
कर रहे
हैं दुनिया को
बदरंग, मनहूस.
ये शहरों
के ज़ालिम
कि गांवों
के मुज़रिम
सब तरफ
से आती हैं
चीखें...
कैसे सो
पाओगे हिन्दुस्तान....
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| डॉ. सुभाष महर्षि |


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