बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

दीप जलता है-प्रदीप त्रिवेदी(दीप)

 दीप जलता है

deep-jalta-hai
दीप जलता है

दीप जलता है

दीप जलता है,

अंधेरी घाटियों में।

बह रही है,

तेज की सम्वेत धारा।

उच्च श्रृगों का,

बना श्यामल किनारा।

खिल गई झिलमिल छटा,

वन वादियों में।

मंदिरों में,

आरती के दीप जलते,

घंटियों के स्वर,

मधुर संदेश कहते।

बुझ ना पाते,

दीप मन  के,

आंधियों में।

दीप जलता है,

अंधेरी घाटियों में

deep-jalta-hai
प्रदीप त्रिवेदी(दीप)



                                                

 

 


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