रविवार, 13 सितंबर 2020

sankriti hindi poem - संस्कृति दम तोड़ती यहां-डॉ.रसिक किशोर सिंह 'नीरज'

 संस्कृति दम तोड़ती यहां

sankriti hindi poem by dr neeraj- संस्कृति दम तोड़ती यहां-हिंदीं कविता

कुलपति डॉ. राजाराम जी के रायबरेली आगमन पर साहित्यकार डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज ने कुलपति का स्वागत करते  हुए अपनी संपादित पुस्तके  भेंट की

संस्कृति दम तोड़ती यहां


शहरों का
 सुख छोड़कर
 आया गांव अपने घर। 

अतीत की 
यादें 
लिए हुए
 मन आंगन
 मुस्कुराए
 वृद्धा जवानी
 बचपन
 अपना फिर
 बच्चों को सुनाएं। 

विश्वास आस 
भरे 
जगमगाए 
दीप डेहरी में धर
 आया गांव अपनी घर।

सुन रहा हूं 
पक्षियों का शांत 
यह कलरब जुबानी
 लौट  आये।
स्मृतियो में
 वो भूले दिन
 शाम सुहानी।
क्यों?
 चौपाल सूनी हैं
 यहां
 बंधु भाव रहता किधर?
 आया गाँव अपने घर । 
उन बूढ़ी आंखों में
 धुंधली सी
 यादों की परछाई
 विकास
 प्रेम उड़ गया
 आई पश्चिम
 से पुरूवाई।
'नीरज'
 संस्कृति दम 
तोड़ती यहां
 लगी गांव को नजर
 आया गांव अपने घर। 



1 टिप्पणी:

  1. Dr रसिक सर जी का बहुत बहुत आभारी हूँ उन्होंने कलम के माद्यम से hindirachnakar मंच पर पहली रचना लिखी बहुत बहुत आभार

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