मंगलवार, 15 सितंबर 2020

Maa ki mamta sentimental hindi story | माँ की ममता - हिंदी कहानी

 Maa ki mamta sentimental hindi story | माँ की ममता - हिंदी कहानी

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रूबी शर्मा

माँ की ममता


जिस बेटे को मालती ने बड़े प्रेम और स्नेह से पाला था,जिसका हर प्रकार का बोझ उसने प्रसन्नतापूर्वक उठाया था ।आज वृध्दावस्था आने पर उसी बेटे की पत्नी मीना के लिए वह बोझ बन गयी थी ।योगेश तो अपनी माँ की सेवा करना चाहता था ,उनकी जरुरते पूरी करना चाहता था लेकिन मीना हमेशा उसे मना करती थी ।वह कहती, इनकी इतनी सेवा की जरूरत नहीं है,ये बिल्कुल हृष्ट-पुष्ट तो है।खाने पीने में तो कोई कसर नहीं छोड़ती हैं ।अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई और सेहत का ख्याल रखो।योगेश चाह कर भी अपनी माँ के लिए कुछ नहीं कर पाता था ।

     योगेश पेशे से वकील था।दूसरों को न्याय दिलाना उसका काम था,लेकिन खुद के घर में वह विवश था।पत्नी के सामने उसकी एक भी नहीं चलती थी ।उसे हमेशा झुकना ही पड़ता था ।
           मीना अपनी सास को अपनी माँ जैसे नहीं मानती थी ।न ही उनका उचित सम्मान करती थी ।योगेश के घर पर होने पर तो वह ढंग से खाना पानी देती थी और न होने पर उन्हें पेट भर खाना भी नहीं देती थी ।फटकारती ऊपर से थी।
     मालती अपनी बहू के ऐसे व्यवहार से बहुत परेशान रहती थी ।वह सोचती थी कि मैने तो एक आदर्श बहू की कल्पना की थी। मैंने तो चाहा था वह मुझे सास नहीं मां माने और मां जैसा प्रेम दे ,परंतु यहां तो सब उसके विपरीत ही है।
      एक दिन मालती को बहुत तेज बुखार था ।सिर तप रहा था ।उसने मीना से कहा ,"बहू! मुझे बहुत तेज बुखार है, शरीर भी इसी वजह से दर्द कर रहा है। मुझे डॉक्टर को दिखाकर दवा दिला दो।"
        मीना ने उनकी बात को अनसुनी कर दी ।ऐसा लगा जैसे उसने सुना ही नहीं ।मालती दुखी मन से वहां से चली गई। सूती कपड़ा लेकर पानी में गीला करके सिर पर रख कर लेट गई।
       शाम को योगेश जब वापस आया तो उसने देखा मां को बहुत तेज बुखार है वह डॉक्टर के पास गया वहां से दवा लाकर मां को खिलाया। यह देख कर मीना का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया ।बोली ,"मामूली सा बुखार है ।दवा में पैसे खर्च करने की क्या आवश्यकता थी। कल तक अपने आप ही ठीक हो जाती। "
      योगेश ने कहा," मां को मामूली नहीं बहुत तेज बुखार है । उन्हें दवा की जरूरत थी ।"बात ही बात पर मीना योगेश से झगड़ने लगी।
     वह बोली ,"सारा पैसा तुम इस बुढ़िया पर ही खर्च कर दोगे तो हमारे भविष्य का क्या होगा। हम सब की जरूरते कैसे पूरी होंगी ।"योगेश ऊब कर वहां से उठकर बाहर चला गया ।
          कुछ दिन बाद तो मीना ने हद ही कर दी ।वह योगेश से बोली ,"मुझे घर पर बहुत सा काम रहता है ।मैं उसी में थक जाती हूं ।मुझसे अब तुम्हारी मां का भार उठाया नहीं जाता है। मैं इनकी देखभाल नहीं कर सकती, इसीलिए आप इन्हें वृद्धा आश्रम मैं छोड़ आओ जो पैसा पड़ेगा हर महीने दे देना।"
         पत्नी की यह बात सुनकर योगेश के जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई हो ।उसे बहुत दुख हुआ। वह बोला ,"यह कदापि नहीं हो सकता। मैं मां को वृद्धाश्रम मैं नहीं छोड़ सकता हूं ।यह मेरी मां है । यह हम सब के साथ रहेंगी। मीना बोली," ठीक है अगर यह इस घर से न जाएंगी तो मैं ही चली जाती हूं ।मैं कल ही अपने मायके चली जाऊंगी। मुझे नहीं रहना इनके साथ ।"मीना ने बहुत कुछ उल्टा सीधा सुनाया।
            बेटा और बहू की नोक झोक मालती सुन रही थी ।वह रो रही थी। अपने भाग्य को कोस रही थी। मन ही मन ईश्वर से कह रही थी ।हे प्रभु !ऐसे जीवन से तो मृत्यु अच्छी है ।मुझे मृत्यु दे दो। मैं सबके लिए भार बन गई हूं। मेरा बेटा चाह कर भी मेरे लिए कुछ नहीं कर सकता ।मैं यहाँ नहीं रहूंगी तो सब खुश रहेंगे ।मुझे इन सब की जिंदगी से दूर जाना चाहिए।
         कुछ देर बाद मालती योगेश के पास गई ।बोली ,"बेटा मेरी वजह से तुम दोनों में रोज रोज झगड़ा होता है। घर में अशांति रहती है ।बहू कह रही है कि वह मेरी देखभाल नहीं कर सकती तो तुम मुझे वृद्धाश्रम छोड़ ही दो ।मैं वहां अपनी बाकी जिंदगी गुजार लूंगी। तुम लोग खुश रहो ,बस मैं यही चाहती हूं ।मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से तुम दोनों लोगों का रिश्ता टूटे ।तुम अपना परिवार संभालो ।मेरी चिंता न करो ।कल तुम मुझे वृद्धाश्रम छोड़ आना ।"
       नहीं ,मां! मैं आपको कैसे छोड़ सकता हूं ,आप यहीं रहोगी। जिद मत कर बेटा सब की खुशी इसी में है कि मैं वृद्ध आश्रम में रहूं।
       न चाहते हुए भी योगेश अगले दिन मां को वृद्धाश्रम छोड़ आया। मालती अब वृद्धाश्रम में अपनी जिंदगी के शेष दिन गुजारने लगी ।इधर मीना अब बहुत खुश थी कि उसे उसकी सास से छुट्टी मिल गई ।योगेश को मां की याद आती थी तो वह मीना को बिना बताए उनसे मिलने चला जाता था ।बेटे को आया हुआ देखकर मालती बहुत खुश होती थी।
        समय बीतता गया ।अचानक मीना अब अस्वस्थ रहने लगी ।चेकअप के बाद डॉक्टर ने बताया कि इनकी दोनों किडनी धीरे-धीरे खराब हो रही है ।दवा से अब इनकी किडनी ठीक न हो पाएंगी। यह कुछ ही दिनों की मेहमान है ।हां अगर कोई इन्हें एक किडनी डोनेट कर दे तो यह बच सकती हैं ।एक किडनी के सहारे बहुत वर्षों तक जीवित रह सकती हैं।
          डॉक्टर की बात सुनकर योगेश पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट गया हो। वह बहुत दुखी था। सोच रहा था कि ईश्वर ने ऐसा क्यों किया ।अगर मीना को कुछ हो गया तो मेरे घर और बच्चों को कौन संभालेगा ।घर आकर दोनों रो रहे थे।
        मीना तुम चिंता ना करो हमने सुख दुख में साथ निभाने का वादा किया था ।हम अपना वादा निभाएंगे। हम अपनी एक किडनी तुम्हें लगवाएंगे ,जिससे हम दोनों साथ-साथ जी सकें।
          अगले दिन योगेश मां से मिलने गया। वह बहुत उदास था। मां ने उसकी उदासी का कारण पूछा। उसने कहा ,"मां !कुछ ठीक न है डॉक्टर ने बताया मीना की दोनों किडनी खराब हो गई हैं ।वह चंद दिनों की ही मेहमान है ।मां !डॉक्टर ने यह भी कहा कि कोई अपनी एक किडनी उसे दे दे तो वह बच सकती है इसीलिए मैंने निश्चित किया है कि मैं अपनी एक किडनी मीना को लगवा दूंगा ।मां !अगर मीना को कुछ हो गया तो मेरे बच्चों का क्या होगा ,घर को कौन संभालेगा।
       मीना की बीमारी सुनकर मालती को बहुत धक्का लगा ।उसने कहा," बेटा !यह तो ईश्वर ने बहुत खराब किया है ।मीना के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था ।
      उसके अंदर मां की ममता जागृत हो गई और बोली बेटा मीना को किडनी की जरूरत है न ,तो तुम किडनी न दोगे। हम मीना को किडनी देंगे ।अभी तुम्हारी उम्र बहुत शेष है ।बहुत सारे काम तुम्हें करना है। बच्चों की उचित परवरिश करनी है, इसीलिए तुम्हारा स्वस्थ रहना आवश्यक है । तुमने किडनी निकलवाई तो तुम और मीना दोनों में से कोई भारी काम नकर पाएगा ।मैंने तो अपनी जिंदगी जी ली है ।मेरी किडनी मीना के काम आएगी तो अच्छा है उसका जीवन बच जाएगा।
       मां की बात सुनकर योगेश का हृदय भर आया ।वह बोला ,"मां आप उस मीना की चिंता कर रही हो जिसने आपको अपार दुख दिया। आप उसे अपनी किडनी देने की बात कह रही हो जिसने भरपेट आपको खाना भी नहीं दिया। आप उसकी जिंदगी बचाने के लिए सोच रही हो जिसकी वजह से आपको वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है।"
        योगेश की बात सुनकर   मालती बोली ,"बेटा !यह समय यह सब सोचने का नहीं है। मीना ने मेरे साथ जो किया सो किया लेकिन अब हमारा फर्ज है कि हम उसे बचाएं ।उसे एक दिन अपने किए पर खुद ही पश्चाताप होगा ।वह अपने आप सही और गलत में फर्क समझ जाएगी ।मैं मां हूं ,भले ही उसकी सास मां हूं ।मुझे अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।"
       आप धन्य है मां ,आपकी सोच कितनी अच्छी है ।अपने साथ बुरा व्यवहार करने वाली मीना के लिए भी इतनी अच्छी सोच है।
       दो-चार दिन बाद मीना का ऑपरेशन हुआ ।मालती ने अपनी एक किडनी उसे लगवा दी ।डॉक्टर ने बताया कि अब सब ठीक है ।मीना बहुत जल्दी ठीक हो जाएगी लेकिन अब आपको मीना और मां दोनों का कुछ समय तक उचित ध्यान रखना होगा ।योगेश ने कहा ,"हां ,डॉक्टर साहब हम दोनों लोगों का ख्याल रखेंगे।"
          मीना को जब होश आया तो वह सोच रही थी कि मेरे पति योगेश ने मुझे किडनी दी है लेकिन जब उसे पता चला कि उसे किडनी योगेश ने नहीं उसकी सास मालती ने दिया है। यह सुनकर उसे बहुत दुख हुआ ।उसने सोचा जिस मां को हमने हमेशा दुत्कारा ,अपमानित किया, कष्ट दिया, आज उसी ने मेरे प्राण बचाए हैं। उसका हृदय आत्मग्लानि से भरा हुआ था ।उसका हृदय अब मालती के लिए निर्मल गंगा जैसा हो गया था। किसी प्रकार की कोई  शिकायत न थी। वह पश्चाताप की अग्नि में जल रही थी। उसे अपने किए पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। वह अपनी ही नजरों में गिर गई थी ।उसका हृदय उसे कचोट रहा था।
        वह कैसे भी उठकर मां के पास गई और उनसे रो-रो कर माफी मांगने लगी ।मालती ने उसे माफ कर दिया और कहा ,"बेटी! हर इंसान को अपने जैसा समझना चाहिए ।किसी को दुख देना नहीं देना चाहिए।"
        मीना ने मां से वादा किया मां अब मैं कभी ऐसा न करूंगी ।किसी के साथ बुरा बर्ताव न करुंगी। हमेशा आप की देखभाल और सेवा करूंगी। मैं आपको मां का पूरा आदर सम्मान दूंगी ।अब आप हम सब के साथ अपने घर में ही रहेंगी ।हम सबको आपकी ,आपके आशीर्वाद की जरूरत है।
        दरवाजे पर खड़ा योगेश यह देख और सुन रहा था ।मीना का ऐसा व्यवहार देखकर वह बहुत खुश हुआ। अत्यंत खुशी से उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे।
      डॉक्टर के डिस्चार्ज करने पर सभी खुशी-खुशी घर गए। अब सभी बहुत खुश थे ।मालती को अब एहसास हो रहा था कि वह अपने परिवार में है। सभी उसका सम्मान करते और ख्याल रखते थे।
 

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