शनिवार, 19 दिसंबर 2020

Poem on corona-इस कोरोना काल में

Poem on corona

इस कोरोना काल में

Poem- on- corona
Poem on corona


दर्द हमारा सूना निकला, इस कोरोना काल में।

रिश्ते नाते दूर हो गए,इस कोरोना काल में।

तिमारदार अब दूर ,हो गए इस कोराना काल में ।

रोती आंखें दर्द हमारा, इस करो ना कॉल में।

हमदर्दी और सहयोग की बातें ऑनलाइन अब सिमट गई।

गमी हो जाए किसी के घर में तो जोमोटो से खाना भिजवाए।

बात अगर रिश्तो की होगी तो सबसे पहले वही इतराए।

कैसे-कैसे दिन देखे हैं इस कोरोना काल में।

रिश्ते नाते धोखा लगते इस कोरोना काल में।

ये सब दूर बैठे आंसू बहाए हमारे संक्रमण काल में।

क्या हम भी अब स्वार्थी हो जाएं इस कोरोना काल में।

क्या हम भी अब ऑनलाइन हो जाए इस कोरोना काल में।

क्या हम भी अब जोमोटो से

 लंच पैकेट भिजवाए इस कोरोना काल में।

नहीं हम ऐसे नहीं हो सकते इस कोरोना काल में।

हम सबको मिलकर लड़ना है इस कोरोना काल में।

Poem-on-corona
आस्था श्रीवास्तव


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