शनिवार, 7 नवंबर 2020

न्याय भी लाचार है यारों-प्रदीप त्रिवेदी दीप

 गजल 

nyaay -laachaar-yaaron

न्याय भी लाचार है यारों


 क्या बताऊं न्याय भी लाचार है यारों

 कहीं छूरी तो कहीं  तलवार है यारों

 किसी की भी कोई सुनता नहीं

 आज तो भ्रष्टाचार की भरमार है यारों

 न्याय देने वाले भी अब न्याय क्या देंगे

 लक्ष्मी की उनको भी दरकार है यारों 

 लेखपालों की छूरी तो पेशकारों के छुरे

 इनसे बचकर निकलना दुश्वार है यारों

 हर कहीं  बैठे है

  दुराचारी कुर्सी पर और उन पर ही जमी सरकार है यारों  

  दीप रौशन हो के भी अब क्या करेंगे

    रोशनी देने  लगा जब अंधियार यारों 

   

nyaay-laachaar -yaaron

                  

 प्रदीप त्रिवेदी दीप

  साहि.सम्पादक दिशेरा टाइम्स  

बी1/11क्रान्तिपुरी जेल रोड

  रायबरेली (उ. प्र) 

  भारत 

मो. नं **9026198044

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