सोमवार, 16 नवंबर 2020

Diwali hindi kavita-जला दो एक दीप

Diwali-hind- kavita
जला दो एक दीप


जला दो एक दीप

जला दो

एक दीप अंतस में भी प्रेम का

सूख गई है 

इस घट की बाती 

स्नेह के अभाव में 

जला दो एक दीप

अंतस में भी प्रेम का 

न जाने कितने अरसे से 

छाई हुई है कालिमा 

पटी पड़ी है 

छल- कपट की धूल 

न जाने कितने युगों से 

चीख चीखकर बता रही हैं

हमारे घरों की

बंद खिड़कियां 

नहीं फलीभूत होगा 

स्वार्थीअंधी दौड़ का 

जब तक मुरझाया रहेगा  

निश्छल चेहरा कलुआ का

बता रहा है इतिहास आज 

पथ पर चलने वाला 

ईर्ष्या दंभ पाखंड के

नहीं रह सका सुख- चैन से 

अरमानों के अपने 

 स्वर्ण- महल में

जला भी दो

दीप एक

अंतस में भी स्नेह का 

लेखक के बारे मे जाने 

संपूर्णानंद मिश्र

प्रयागराज फूलपुर

7458994874


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