हिन्दी रचनाकार

हमारे वेबसाइट पर हिंदी साहित्य में सभी विधाओं पर रचनाएं लेख, कविता, गीत और गजल प्रेरणादायक कहानियां, यात्रा वृतांत प्रकाशित किए जाते हैं इस वेबसाइट के माध्यम से हिंदी को विश्व स्तर पर हिंदी प्रेमियों के लिए हिंदी, हिंदू ,हिंदुस्तान की प्रतिष्ठा और पहचान तथा हिंदी को राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने का प्रयास है

  • Home
  • hindi kavita
  • hindi geet
  • hindi sahitya
  • biography
  • awadhi poetry
  • book review
  • gazal
  • dohe hindi
  • inauguration ceremony
  • hindi navgeet
  • hindi kahaniya
  • chhand
  • hindi vyang
  • About us
  • Contact us

शनिवार, 12 सितंबर 2020

Motivational dohe in hindi-जय चक्रवर्ती के दोहे

 Motivational dohe in hindi-जय चक्रवर्ती के दोहे
Motivational dohe in hindi-जय चक्रवर्ती के दोहे-दोहे हिंदी,हिंदीं
जय चक्रवर्ती

                                                                      

जय चक्रवर्ती के दोहे

---------------------------

हम पीड़ा के वंशधर , सिर पर दुख की धूप
अश्रु, आग, बादल, नदी, सभी हमारे रूप.

 जो कुछ कहना था कहा,मुँह पर सीना तान
एक आइना उम्र भर, मुझमें रहा जवान.

रहे लेखनी की प्रभो, हरदम पैनी धार
अँधियारों पर कर सकूँ, मैं जीवन-भर वार.

 अभी हमारे पास है, ज़िन्दा एक ज़मीर
अभी हमारी आँख में, बचा हुआ है नीर.

दरबारों की गोद में, आप मनाएं जश्न
हम तो पूछेंगे सदा, भूख प्यास के प्रश्न.

झूठ और पाखंड से, जूझूँगा दिन- रात
 मुझमें ज़िन्दा है अभी, कहीं एक सुकरात.

पुरस्कार, सम्मान सब, रख ले अपने पास
रहने दे मुझमें अभी, खुद्दारी की प्यास.

एक समंदर आग का, एक मोम की नाव
पारगमन के वास्ते, लहरों के प्रस्ताव.

मिले न ग्राहक दर्द के, खुशियां बिकी उधार
बस यूं ही चलता रहा, जीवन का व्यापार.

अपरिमेय हर कोंण है, हर रेखा अज्ञेय
कभी न इति सिद्धम् हुई, जीवन कठिन प्रमेय.

 दुनिया भर की खोज में, भटक रहा है रोज
वक़्त मिले तो एक दिन, खुद में खुद को खोज.






पर सितंबर 12, 2020
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
लेबल: Dohe hindi

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आपकी मातृभाषा हिंदी है,
तो यहाँ अपनी टिप्पणी भी हिंदी (देवनागरी लिपि)
में ही प्रकाशित करने की कृपा कीजिए!
टिप्पणी पोस्ट करने से पहले
ई-मेल के द्वारा सदस्यता ले लिया कीजिए,
ताकि आपकी टिप्पणी प्रकाशित होने के बाद में यहाँ होनेवाली चर्चा का पता भी आपको चलता रहे और आप बराबर चर्चा में शामिल रह सकें!

नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
  • एकता कप क्रिकेट प्रतियोगिता में फॉरेस्टर 11 का शानदार प्रदर्शन
     रायबरेली : लेखनशाला संस्था द्वारा आयोजित एकता कप क्रिकेट प्रतियोगिता में फॉरेस्टर 11 के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर सभी का ध्...
  • bhaarat kee maulikata - anekata mein ekata
      bhaarat kee maulikata - anekata mein ekata असिस्टेंट प्रोफेसर,  अशोक कुमार भारत की मौलिकता : अनेकता में एकता*     विश्वगुरु भारत विभिन्न ध...
  • साहित्य जगत का एक नन्हा सा जुगनू आशा शैली-biography of asha shailee
      biography of asha shailee आशा शैली  साहित्य जगत का एक नन्हा सा जुगनू ( biography of asha shailee)    साहित्य जगत में शनै-शनै अपनी रोशनी बि...

Popular Posts

  • एकता कप क्रिकेट प्रतियोगिता में फॉरेस्टर 11 का शानदार प्रदर्शन
     रायबरेली : लेखनशाला संस्था द्वारा आयोजित एकता कप क्रिकेट प्रतियोगिता में फॉरेस्टर 11 के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर सभी का ध्...
  • bhaarat kee maulikata - anekata mein ekata
      bhaarat kee maulikata - anekata mein ekata असिस्टेंट प्रोफेसर,  अशोक कुमार भारत की मौलिकता : अनेकता में एकता*     विश्वगुरु भारत विभिन्न ध...
  • साहित्य जगत का एक नन्हा सा जुगनू आशा शैली-biography of asha shailee
      biography of asha shailee आशा शैली  साहित्य जगत का एक नन्हा सा जुगनू ( biography of asha shailee)    साहित्य जगत में शनै-शनै अपनी रोशनी बि...
  • " अंग्रेजी के अल्पज्ञान ने हिंदी को पंगु बना दिया है।" - असिस्टेंट प्रोफेसर, चीफ प्रॉक्टर अशोक कुमार गौतम|'हिंदी रचनाकार' वेबसाइट
     " अंग्रेजी के अल्पज्ञान ने हिंदी को पंगु बना दिया है।" -     असिस्टेंट प्रोफेसर, चीफ प्रॉक्टर अशोक कुमार गौतम|'हिंदी रचनाकार...
  • Bachpan par hindi kavita- कोई लौटा दे मेरा बचपन/ कल्पना अवस्थी
    Bachpan par hindi kavita कोई लौटा दे मेरा बचपन   हर तरफ फैला बस खुशियों का तराना था  सबसे प्यारा वह बचपन का जमाना था । मां की गोद थी, पापा क...
  • poem on matrbhasha in hindi/मातृभाषा हिंदी-अखिलेश प्रताप सिंह
    poem on matrbhasha in hindi मातृभाषा हिंदी  
  • Awadhi kavya-वह तौ सब आजु सपन होइगा/ इन्द्रेश भदौरिया
    Awadhi kavya   वह तौ सब आजु सपन होइगा रिसियाउरि दाली का दुलहा  अब कहूँ पनेथी बनत नहीं। दलभरिया पूरी बनत नहीं  दलभरी कचउरी बनत नहीं। अब कढ़ी फ...
  • sankriti hindi poem - संस्कृति दम तोड़ती यहां-डॉ.रसिक किशोर सिंह 'नीरज'
     संस्कृति दम तोड़ती यहां कुलपति डॉ. राजाराम जी के रायबरेली आगमन पर साहित्यकार डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज ने कुलपति का स्वागत करते  हुए अपनी सं...
  • Hindi poem on childhood-बचपन की कविता/सीताराम चौहान पथिक
    Hindi poem on childhood         बचपन ।।  बच्चों में मैं बच्चा बन कर ,  बचपन को  दोहराता  हूं ।  खूब खेलता बच्चों के संग ,  मैं बच्चा  बन  जा...
  • Nafrat ki aag-नफ़रत की आग/संपूर्णानंद मिश्र
    Nafrat ki aag   नफ़रत की आग Nafrat ki aag नफ़रत की आग   लिए क्यों बैठे हो  आपदा में भी  इतने क्यों ऐंठे हो   सीने में खंज़र  भोंकने की ख्वा...

फ़ॉलोअर

यह ब्लॉग खोजें

This Blog is protected by DMCA.com

कुल पेज दृश्य

Translate

Hindirachnakar all rights reserved. molotovcoketail के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.