रविवार, 30 अगस्त 2020

चिड़िया कहां रहेगी? -महादेवी वर्मा- हिंदीं कविता

 

Kaha-rahegi-chidiya
Kaha-rahegi-chidiya

Kaha rahegi chidiya


आंधी आई जोर शोर से, 

डाले टूटी हैं झकोर से ।

थोड़ा हौसला अंडे फूटे, 

किससे दुख की बात कहेगी! 

अब यह चिड़िया कहां रहेगी? 

हमने खोला अलमारी को, 

बुला रहे बेचारी को।

 पर वो ची -ची करती है, 

घर में तो वह नहीं रहेगी! 

अब यह चिड़िया कहां रहेगी?

 घर पर  पेड़ कहां से लाएं, 

कैसे यह घोंसला बनाएं।

 कैसे फूटे अंडे जोड़ें, 

किससे यह बात कहेगी! 

अब यहचिड़िया कहां रहेगी? -महादेवी वर्मा

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